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Sunday, September 10, 2017

राम रहीम की फिल्मों को क्यों मिला था टैक्स फ्री का स्टेट्स ? यहां जानिए पूरा सच

सरकार की मेहरबानी से गुरमीत की सभी फिल्में थीं टैक्स फ्री
सीधे गुरमीत के खजाने में जाती थी सिनेमा हाल से होने वाली कमाई 

सिरसा । डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह के डेरे पर 2 दिन से सर्च ऑप्रेशन चल रहा है। एक के बाद एक हो रहे खुलासों की कड़ी में यह भी तथ्य सामने आया है कि डेरा सच्चा सौदा का सियासत पर खासा दबदबा था। यही कारण था कि गुरमीत सिंह ने केवल एक फिल्म पर टैक्स अदा किया बाकी फिल्मों पर सरकार की मेहरबानी हो गई और उन्हें टैक्स फ्री कर दिया गया। इस बात की पुष्टि मनोरंजन टैक्स विभाग के ईटीओ सुरेंद्र गोदारा भी करते हैं। गोदारा ने बताया कि लाइसैंस डीएम ऑफिस से 6 माह के लिए दिया था और इसके बाद की कार्रवाई भी उसी विभाग ने करनी थी, लेकिन डेरा की ओर से पहली फिल्म पर उनके विभाग को जरूर टैक्स दिया गया, लेकिन बाद में सरकार ने हर फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया व विभाग को इस बारे में अवगत करवा दिया, इसलिए वे आगामी कार्रवाई नहीं कर सकते थे।
गुरमीत के दरबार में जहां प्रदेश सरकार के मंत्री झुकते नजर आते थे, वहीं समूची सरकार भी इसे राहत देती नजर आई। डेरा सच्चा सौदा में बने सिनेमा हाल से होने वाली कमाई सीधे गुरमीत के खजाने में जाती थी, चूंकि सरकार ने सभी फिल्मों को ही टैक्स फ्री किया था। इसके अलावा जिस सिनेमा हॉल को डेरे में तैयार किया, उसकी बुनियाद भी नियमों की किसी किताब से मेल नहीं खाती, लेकिन डेरा के दबाव को देखते हुए प्रशासन ने करीब अढ़ाई साल पहले महज 6 माह की अवधि के लिए टैम्परेरी लाइसैंस जारी किया था। अब इस लाइसैंस का स्टेटस क्या है? कोई बताने को तैयार नहीं, लेकिन मनोरंजन विभाग खुद को इसलिए दूर कर रहा है कि सरकार के ऐलान’ के कारण ही वह कुछ नहीं कर सकते।

Friday, September 8, 2017

LATEST : राम रहीम का पर्दाफाश, डेरे में चलाता था प्लास्टिक की करेंसी

हरियाणा । गुरमीत राम रहीम न सिर्फ डेरे में अपनी मनमानी करता था, बल्कि उसके द्वारा आसपास के मार्केट में प्लास्टिक की करेंसी भी चलाई जा रही थी। इस बात का खुलासा शुक्रवार की सुबह डेरा स्थल पर पहुंची पुलिस द्वारा लिए जा रहे तलाशी अभियान में सामने आया है। इनमें अलग अलग तरह की मुद्राओं का संचालन किया जा रहा था, जिसके जरिए सामान की खरीदी एवं बिक्री की जाती थी। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि अनुयायियों का यह करेंसी कुछ खास लोगों के द्वारा ही दी जाती थी और इसी के आधार पर सामान खरीदा जाता था। हालांकि पुलिस के दल की फिलहाल आश्रम स्थल पर जांच जारी है। 

Thursday, September 7, 2017

जमीन खोद डेरे में दफन नरकंकाल निकालेंगे सुरक्षा बल

हिसार . गुरमीत राम रहीम सिंह के डेरों के सघन निरीक्षण की हरियाणा पुलिस व अर्धसैनिक बलों ने पूरी तैयारी कर ली है। इस दौरान जमीन में गाड़े गए विस्फोटकों और नरकंकालों को खोजने का प्रयास किया जाएगा। राम रहीम के सलाखों के पीछ जाने के बाद से हरियाणा में शांति है।  प्रशासन का मानना है कि राम रहीम के समर्थक फिर से उत्पात कर सकते हैं।  इसलिए सिरसा में एहतियातन अब भी सेना तैनात है।
राम रहीम के पूर्व अंगरक्षक बेअंत सिंह और कुछ अन्य लोगों ने बताया कि राम रहीम ने अपने हत्या के बाद डेरे में ही दफन कर दिया गया है।  सैकड़ों लोगों को गला घोटकर मारा गया था और उनके शव भाखड़ नहर में दिए गए। यह सिलसिला सालों चलता रहा। इसके बाद मारे जाने वाले लोगों का दाह संस्कार किया जाने लगा।  उनकी हड्डियां डेरे के पीछे बने बाग में गाड़ दी जाती थीं। यह सनसनीखेज राज फाश डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के गार्ड रहे बेअंत सिंह ने किया, जो खुद भी गुरमीत राम रहीम सिंह की ज्यादतियों का शिकार हुआ था।

Wednesday, September 6, 2017

मन मुताबिक दामों पर सब्जी बेचता था गुरमीत

- पांच हजार में एक पपीता तो एक हरी ‎मिर्च एक हजार की

नई दिल्ली । दो साध्वियों से रेप करने के जुर्म में सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम की कारगुजारियां लगातार सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक राम रहीम अपने भक्तों को भगवान के नाम पर फंसा लेता था और मन मुताबिक दामों पर सब्जी बेचता था। एक हरी मिर्च एक हजार रुपए की, एक छोटा बैंगन एक हजार रुपए का। बैंगन का साइज बड़ा हो तो उसकी कीमत दो हजार हो जाती थी। मटर के पांच दानों का पैक एक हजार रुपए तक मिलता है। अगर आपने आधा किलो मटर लिया होता तो लाखों में उसकी कीमत होती। इतना ही नहीं राम रहीम अपने अंधभक्तों को 5000 रुपए में एक पपीता बेचता था।
गौरतलब है ‎कि सिरसा में राम रहीम का डेरा करीब 800 एकड़ में फैला है, जिसके बड़े हिस्से में खेती की जाती है। इन खेतों में उगने वाली सब्जियों को राम रहीम अपने भक्तों को सोने के दाम पर बेचता था। बाबा दो टमाटर के लिए दो हजार लेता था। भक्तों में अंधभक्ति ऐसी थी कि बाबा के बाग की सब्जी का स्वाद हर कोई चखना चाहता था। परिवार के एक सदस्य को भी हजारों की कीमत का मटर का एक दाना मिलता तो वो खुद को धन्य समझता। राम रहीम की सब्जी किसी भी कीमत पर खरदीने के पीछे का कारण था कि भक्त कहते थे हमारे पिता ने अपने हाथ से इस सब्जियों को उगाया है। इन्हें खाने से हमें कोई बीमारी नहीं होगी।