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Thursday, September 7, 2017

मोदी और अमित शाह ने जनता को 'पप्पू' बनाया: दिग्विजय

- कहा, जिस तरह मोदी जी और अमित शाह जी ने हमें बेवकूफ बनाया वह अभूतपूर्व है 

अहमदाबाद .कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विकास के गुजरात मॉडल के नाम पर लोगों को 'पप्पू' बनाया और यह मॉडल पूरी तरह नाकाम रहा है। दिग्विजय ने गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस छोड़ने और पिछले महीने हुए राज्यसभा चुनावों में पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के खिलाफ वोट करने पर पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला की भी आलोचना की। द्वारका रवाना होने से पहले तटीय पोरबंदर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुखातिब दिग्विजय ने कहा ‎कि जिस तरह मोदी जी और अमित शाह जी ने हमें बेवकूफ बनाया वह अभूतपूर्व है।
विकास के गुजरात मॉडल पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि सामाजिक विकास के संकेतकों पर गुजरात अन्य राज्यों से पिछड़ा हुआ है और वाइब्रेंट गुजरात समिट के दौरान जिन सहमति-पत्रों पर दस्तखत हुए, उन पर अमल नहीं हो सका। उन्होंने कहा ‎कि 'कहां है गुजरात मॉडल? सामाजिक विकास के संकेतकों पर राज्य का 13वां या 14वां स्थान है और वाइब्रेंट गुजरात में सहमति-पत्रों पर दस्तखत तो हुए लेकिन कारखानों की स्थापना नहीं हुई। गुजरात किसी भी स्तर पर नंबर एक राज्य नहीं है। वाघेला पर निशाना साधते हुए दिग्विजय ने कहा ‎कि कांग्रेस ने वाघेला को सब कुछ दिया। इसने आपको मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बनाया। पार्टी ने आपको हरसंभव तरीके से मदद की, लेकिन आपने विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ दी। आपने अहमद पटेल जैसे शख्स को धोखा दिया, जिन्होंने आपकी हमेशा मदद की।

Wednesday, September 6, 2017

शिक्षा का निजीकरण बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ : पायलट

जयपुर, 06 सितम्बर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा स्कूलों कानिजीकरण किए जाने को छात्रहितों के खिलाफ बताया है।
पायलट ने बयान जारी कर कहा कि पूर्व में भी प्रदेश की भाजपा सरकार ने चिकित्सा सेवा का निजीकरण किया था और अब सरकार ने लगभग 300 सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में देने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं शिक्षा जनता को सुलभ करवाना एक लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व है। गत् यूपीए सरकार ने शिक्षा से वंचित बच्चों को साक्षर बनाने व उनके भविष्य को सही मुकाम देने के लिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम को इसी उद्देश्य से लागू किया था। उन्होंने कहा कि स्कूलों के निजीकरण से सरकारी सम्पत्ति निजी हाथों में चली जाएगी और सरकारी शिक्षक भी सरप्लस हो जाएंगे जिसकी वजह से शिक्षकों की भर्तियों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जिन चिकित्सा सेवाओं का निजीकरण किया गया है उनके द्वारा जनता को होने वाली लाभ-हानि की जानकारी अभी तक सरकार ने सार्वजनिक नहीं की है।  उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेशभर में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है और अव्यवस्थाओं के कारण नवजात बच्चों की मौतों से प्रदेश कलंकित हो रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था को ठप्प कर सरकार अब शिक्षा व्यवस्था को पटरी से उतारना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार के मूलभूत सेवाओं के निजीकरण के फैसले से साबित हो गया है कि सरकार अपने निहित उद्देश्य साधने के लिए जनता के हितों के साथ समझौता कर रही है  और सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ा रही है जिसके आगामी समय में विपरीत प्रभाव सामने आएंगे।