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Monday, September 14, 2015

Latest : Four Indian Navy ships deployed in Qatar, Insisted on military exercises


भारतीय नौ सेना के चार जहाजों की कतर में तैनाती, सैन्य अभ्यास पर जोर

 

देश में जमीनी सीमा पर लगातार पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी की जा रही है, वहीं भारतीय नौसेना के चार जहाज दीपक, दिल्ली, तबर और त्रिशूल खाड़ी में एक महीने की तैनाती पर हैं ताकि द्वीपक्षीय संबंध बढ़ाए जा सके और क्षेत्रीय मित्र नौसेना के साथ नौ सैनिक अभ्यास किया जा सके। खाड़ी गए जहाज भारतीय नौसेना के पश्चिमी बेड़े के हिस्से हैं और इनका ठिकाना मुंबई है। चार जहाजों में आईएनएस दिल्ली और आईएनएस त्रिशूल ने आज कतर के दोहा में प्रवेश किया और वहां
17 सितंबर तक रहेंगे। इस दौरान जहाज सहयोग बढ़ाने के लिए तथा आपदा प्रबंधन और समुद्री आतंकवाद के खतरों से निपटने और समुद्री डकैती रोकने की नौसैन्य कारवाईयों भी शामिल होंगे। इस दौरान पेशेवर कार्यों के अतिरिक्त खेलों और सामाजिक व्यस्तता सरीखे कार्यक्रम भी बनाए गए है, जिनका उद्देश्य नौ सेनाओं के बीच सहयोग और समझदारी बढ़ाना रखा गया है।

सेना के विशेषज्ञों के अनुसार भारत की समुद्री परंपरा काफी प्राचीन है और खाड़ी देशों के साथ समुद्री संबंध 4000 वर्ष ईसा पूर्व से है। भारतीय नौसेना की क्षमता बहुपक्षीय है। इसमें विमान वाहक , आधुनिक जहाज , पनडुब्बी , विमान तथा समुद्री कमांडो शामिल हैं। भारतीय नौसेना के ढ़ांचे की एक विशेषता यह है कि इसके बेड़े के अधिकतर जहाज भारत में डिजायन और निर्मित किए गए हैं।

भारतीय नौसेना का खाड़ी देशों के सभी देशों के साथ घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं और भारतीय नौसेना अनेक नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास करती रही है। भारतीय नौसेना को क्षेत्र की अनेक नौसेनाओं के प्रशिक्षण तथा जलमापचित्रण का अवसर प्राप्त है। सोमालिया के तट पर समुद्री दस्युओं से लडऩे में भारतीय नौसेना के जहाजों की भागीदारी से क्षेत्र की नौसेनाओं के साथ द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं।

भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय संबंध परम्परागत रूप से आर्थिक तथा जनता के संपर्क पर केन्द्रित रहे हैं। बढ़ते हुए व्यापारिक संबंध शीघ्र भारत को कतर का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बनाएगा। पिछले दशक में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध में वृद्धि हुई और इससे नवंबर, 2008 में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समझौता हुआ। भारत-कतर संयुक्त रक्षा सहयोग समिति के गठन से प्रशिक्षण, सामरिक अध्ययन तथा संयुक्त अभ्यास और सूचनाओं को साझा करने के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते नौसैनिक सहयोग से दोनों देशों के बीच उ'च स्तरीय यात्राएं हुई हैं और नौसैनिक अधिकारियों का प्रशिक्षण हुआ है। भारत और कतर हिन्द महासागर नौसैनिक परिसंवाद (आईएनओएस) के सदस्य हैं। यह संगठन हिन्द महासागर क्षेत्र के &5 देशों का स्वै'िछक एवं सहयोगी संगठन है और इस संगठन ने सूचना आदान-प्रदान तथा समुद्री विषयों पर सहयोग के लिए आदर्श मंच के रूप में सेवा दी है। भारतीय जहाजों की वर्तमान यात्रा भारत की शांतिपूर्ण मौजूदगी तथा खाड़ी देशों में मित्र देशों के साथ एकता और भारत तथा कतर के बीच वर्तमान संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए है।

Monday, September 7, 2015

Controversy : DG wants to crack power of RPF, Is it true ?

आरपीएफ को "पावरलैस" करने की तैयारी

Controversy : DG wants to crack power of RPF

जयपुर . रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को पावर लैस करने की तैयारी है। इसके तहत अभी तक रेल एक्ट में दर्ज होने वाले रेलवे की नगदी चोरी के मामले अब आईपीसी की धारा में दर्ज होने की संभावना है। इसके लागू होने पर आरपीएफ के मामलों में पुलिस की सीधी दखल बढ़ेगी, वहीं आरपीएफ के जवानों की शक्तियों में कमी आएगी।आरपीएफ के महानिदेशक राजीव रंजन वर्मा ने सभी जोन को पत्र जारी कर रेलवे में नगदी चोरी के मामले राज्य की स्थानीय पुलिस के स्तर पर आईपीसी के तहत दर्ज करने के लिए सुझाव मांगे है। साथ ही पत्र में हवाला दिया है कि आईपीसी की धारा में रेल नगदी की चोरी के मामले क्यों दर्ज नहीं किए जाते है ? महानिदेशक के सुझाव का प्रमुख रेलवे जोन के महानिरीक्षकों एवं आरपीएफ जवानों के संगठनों ने विरोध किया है और इस निर्णय के लागू होने पर जवानों में असंतोष बढऩे की संभावना भी जताई है। मामले में आरपीएफ संगठन भी खुलकर महानिदेशक के पत्र के विरोध में आ गए है।

यह है मामला
गत 8 अगस्त को आरपीएफ महानिदेशक राजीव रंजन वर्मा ने पत्र जारी कर प्रमुख जोनों के महानिरीक्षकों से राय मांगी की कि रेलवे की नगदी की चोरी से संबंधित मामले आरपीएफ की बजाए संबंधित पुलिस थानों में आईपीसी की धारा के तहत क्यों नहीं दर्ज किए जाएं ? जबकि रेलवे की नगदी चोरी से संबंधित छह प्रमुख मामले क्यों नहीं पुलिस को सौंपें जाए ? आदि मामलों में महानिरीक्षकों से राय मांगी।

महानिदेशक-जवान आमने-सामने
महानिदेशक का तर्क है कि रेलवे की नगदी की चोरी के मामले में आईपीसी की धारा में अधिक सजा का प्रावधान है, जिनसे आरोपी को सजा भी अधिक होगी। इससे आरोपी फिर से ऐसा काम नहीं करेगा। इसके जवाब में आरपीएफ के जवानों का कहना है कि अगर आईपीसी में दर्ज होने वाले कुछ मामलों में रेल एक्ट अधिक सजा देता है तो क्या आईपीसी के मामले भी रेलवे की आरपीएफ को सौंपे जा सकते है। हालांकि जवानों के सवाल पर फिलहाल महानिदेशक ने चुप्पी साध ली है।

संसद की अवहेलना का आरोप
आरपीएफ एसोसिएशन ने महानिदेशक को पत्र लिखकर विरोध जताया है। उनके अनुसार रेलवे की नगदी की चोरी का मामला रेल सम्पत्ति अवैध कब्जा अधिनियम की धारा 5 के मुताबिक पुलिस के लिए असंघीय अपराध है। पूरे रेल एक्ट के 29 अपराध पुलिस के लिए असंघीय है, जिनमें पुलिस को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। तर्क दिया कि रेलवे सम्पत्ति, यात्री के जान-माल संबंधित सभी मामले केन्द्रीय सूची का विषय है। ऐसे रेलवे से संबंधित मामलों में सिर्फ केन्द्र का दखल हो सकता है, यह राज्य सरकार का विषय नहीं है। इन पर चर्चा सिर्फ संसद में कर सकते है, विधानसभा में नहीं। संगठन का तर्क है कि जब रेलवे की देनदारी क्षतिपूर्ति की है, तो इसे रोकने के लिए रेलवे की आरपीएफ ही संवैधानिक रूप से अधिकृत है। ऐसे मामलों में पुलिस जांच पर पूर्णतया रोक है। उन्होंने महानिदेशक से आरपीएफ को जांच अभियोजक का जिम्मा दिलवाने की भी मांग की है।





Controversy : DG wants to crack power of RPF
इनका कहना है :-
पूरी कोशिश कर रहे है कि रेलवे की सुरक्षा आरपीएफ को मिले, क्योंकि देशभर में जीआरपी में 160 आईपीएस की पोस्ट है। यहीं कारण है कि आईपीएस लॉबी से आए महानिदेशक आरपीएफ को कमजोर करना चाहते है। केन्द्रीय सूची और संसद से पारित कानूनों की अवहेलना कर ऐसे आदेश जारी कर रहे है। अगर ऐसे आदेश जारी हुए तो देशभर में आरपीएफ के जवान विरोध करेंगे।
- उमा शंकर झा, प्रधान महासचिव, ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन

जिस धारा में अपराध की ज्यादा सजा है और अगर वह एप्लाई होती है तो उसे लगाया जाना चाहिए। आईपीसी की धारा को क्यों नहीं लगाया जा रहा है, यहीं मैनें पूछा है। आईपीसी की धारा तो लगनी ही चाहिए। मेरे लिहाज से इससे आरपीएफ की शक्तियां कम नहीं होगी।
- राजीव रंजन वर्मा, महानिदेशक, आरपीएफ

Friday, July 31, 2015

know ! who is yakub memon

कौन है याकूब मेमन


नई दिल्ली. 1993 मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को आखिरकार 30 जुलाई की सुबह फांसी की सजा दे दी गई। आइए बताते है कि आखिर कौन है याकूब मेमन और क्यों दी गई इसे फांसी ?

याकूब का पूरा नाम याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन है। यह पेशे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट का काम करता था। मेमन इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढाई भी कर रहा है। पिछले साल याकूब मेमन ने एमए की द्वितीय वर्ष की परीक्षा दी थी। याकूब ने 2013 में इग्नू से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद याकूब पॉलिटिकल साइंस में फिर से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा था।

फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद से नागपुर सेंट्रल जेल में बंद याकूब की अपनी दूसरे साल की परीक्षा भी नागपुर की सेंट्रल जेल के 'फांसी यार्ड (अतिसुरक्षित जेल, जहां पर कैदी फांसी की सजा का इंतजार करते हैं.) में दी गई थी। बहुचर्चित कैदी होने के कारण याकूब को बाहर जाने की अनुमति नहीं है।


मुम्बई बम धमाकों का आरोपी
मुंबई में 12 मार्च 1993 को सिलसिलेवार 12 धमाके हुए थे। इसमें 257 लोगों की मौत हुई थी। पुलिस और इंटलीजेंस की विशेष टीम ने वर्ष 1993 में मुंबई में हुए इस ब्लास्ट में कथित रूप से दाउद इब्राहिम, टाइगर मेमन और उसके भाई अयूब मेमन को मुख्य षडय़ंत्रकारी माना था और इन्हें मोस्ट वांटेड अपराधी घोषित कर दिया गया था।

टाडा कोर्ट ने 27 जुलाई 2007 को याकूब को आपराधिक साजिश का दोषी करार देते हुए सजा-ए-मौत सुनाई थी। इसके बाद उसने बॉम्बे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति तक के पास अपील की, पर उसे राहत नहीं मिल सकी।


इस धमाके में याकूब के परिवार के चार लोग भी शामिल थे। सीरियल ब्लास्ट का मुख्य आरोपी याकूब मेमन का बड़ा भाई टाइगर मेमन है जो आज तक पुलिस की गिरफ्त से फरार है।

धमाकों के मास्टरमाइंड टाइगर मेमन के भाई याकूब के वकीलों ने अदालत में दलील थी कि वह सिर्फ धमाकों की साजिश में शामिल था, पर धमाकों को अंजाम देने में उसका हाथ नहीं था। इस मामले में विशेष टाडा कोर्ट ने 10 अन्य दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी लेकिन उसे सुप्रीम कोर्ट ने उम्र कैद में बदल दिया।

उल्लेखनीय है कि इसी मामले में अवैध हथियार रखने के दोषी अभिनेता संजय दत्त 6 साल की सजा काट रहे हैं और फिलहाल जेल में बंद है।