Monday, September 7, 2015

Controversy : DG wants to crack power of RPF, Is it true ?

आरपीएफ को "पावरलैस" करने की तैयारी

Controversy : DG wants to crack power of RPF

जयपुर . रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को पावर लैस करने की तैयारी है। इसके तहत अभी तक रेल एक्ट में दर्ज होने वाले रेलवे की नगदी चोरी के मामले अब आईपीसी की धारा में दर्ज होने की संभावना है। इसके लागू होने पर आरपीएफ के मामलों में पुलिस की सीधी दखल बढ़ेगी, वहीं आरपीएफ के जवानों की शक्तियों में कमी आएगी।आरपीएफ के महानिदेशक राजीव रंजन वर्मा ने सभी जोन को पत्र जारी कर रेलवे में नगदी चोरी के मामले राज्य की स्थानीय पुलिस के स्तर पर आईपीसी के तहत दर्ज करने के लिए सुझाव मांगे है। साथ ही पत्र में हवाला दिया है कि आईपीसी की धारा में रेल नगदी की चोरी के मामले क्यों दर्ज नहीं किए जाते है ? महानिदेशक के सुझाव का प्रमुख रेलवे जोन के महानिरीक्षकों एवं आरपीएफ जवानों के संगठनों ने विरोध किया है और इस निर्णय के लागू होने पर जवानों में असंतोष बढऩे की संभावना भी जताई है। मामले में आरपीएफ संगठन भी खुलकर महानिदेशक के पत्र के विरोध में आ गए है।

यह है मामला
गत 8 अगस्त को आरपीएफ महानिदेशक राजीव रंजन वर्मा ने पत्र जारी कर प्रमुख जोनों के महानिरीक्षकों से राय मांगी की कि रेलवे की नगदी की चोरी से संबंधित मामले आरपीएफ की बजाए संबंधित पुलिस थानों में आईपीसी की धारा के तहत क्यों नहीं दर्ज किए जाएं ? जबकि रेलवे की नगदी चोरी से संबंधित छह प्रमुख मामले क्यों नहीं पुलिस को सौंपें जाए ? आदि मामलों में महानिरीक्षकों से राय मांगी।

महानिदेशक-जवान आमने-सामने
महानिदेशक का तर्क है कि रेलवे की नगदी की चोरी के मामले में आईपीसी की धारा में अधिक सजा का प्रावधान है, जिनसे आरोपी को सजा भी अधिक होगी। इससे आरोपी फिर से ऐसा काम नहीं करेगा। इसके जवाब में आरपीएफ के जवानों का कहना है कि अगर आईपीसी में दर्ज होने वाले कुछ मामलों में रेल एक्ट अधिक सजा देता है तो क्या आईपीसी के मामले भी रेलवे की आरपीएफ को सौंपे जा सकते है। हालांकि जवानों के सवाल पर फिलहाल महानिदेशक ने चुप्पी साध ली है।

संसद की अवहेलना का आरोप
आरपीएफ एसोसिएशन ने महानिदेशक को पत्र लिखकर विरोध जताया है। उनके अनुसार रेलवे की नगदी की चोरी का मामला रेल सम्पत्ति अवैध कब्जा अधिनियम की धारा 5 के मुताबिक पुलिस के लिए असंघीय अपराध है। पूरे रेल एक्ट के 29 अपराध पुलिस के लिए असंघीय है, जिनमें पुलिस को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। तर्क दिया कि रेलवे सम्पत्ति, यात्री के जान-माल संबंधित सभी मामले केन्द्रीय सूची का विषय है। ऐसे रेलवे से संबंधित मामलों में सिर्फ केन्द्र का दखल हो सकता है, यह राज्य सरकार का विषय नहीं है। इन पर चर्चा सिर्फ संसद में कर सकते है, विधानसभा में नहीं। संगठन का तर्क है कि जब रेलवे की देनदारी क्षतिपूर्ति की है, तो इसे रोकने के लिए रेलवे की आरपीएफ ही संवैधानिक रूप से अधिकृत है। ऐसे मामलों में पुलिस जांच पर पूर्णतया रोक है। उन्होंने महानिदेशक से आरपीएफ को जांच अभियोजक का जिम्मा दिलवाने की भी मांग की है।





Controversy : DG wants to crack power of RPF
इनका कहना है :-
पूरी कोशिश कर रहे है कि रेलवे की सुरक्षा आरपीएफ को मिले, क्योंकि देशभर में जीआरपी में 160 आईपीएस की पोस्ट है। यहीं कारण है कि आईपीएस लॉबी से आए महानिदेशक आरपीएफ को कमजोर करना चाहते है। केन्द्रीय सूची और संसद से पारित कानूनों की अवहेलना कर ऐसे आदेश जारी कर रहे है। अगर ऐसे आदेश जारी हुए तो देशभर में आरपीएफ के जवान विरोध करेंगे।
- उमा शंकर झा, प्रधान महासचिव, ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन

जिस धारा में अपराध की ज्यादा सजा है और अगर वह एप्लाई होती है तो उसे लगाया जाना चाहिए। आईपीसी की धारा को क्यों नहीं लगाया जा रहा है, यहीं मैनें पूछा है। आईपीसी की धारा तो लगनी ही चाहिए। मेरे लिहाज से इससे आरपीएफ की शक्तियां कम नहीं होगी।
- राजीव रंजन वर्मा, महानिदेशक, आरपीएफ

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