जयपुर, 06 सितम्बर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा स्कूलों कानिजीकरण किए जाने को छात्रहितों के खिलाफ बताया है।
पायलट ने बयान जारी कर कहा कि पूर्व में भी प्रदेश की भाजपा सरकार ने चिकित्सा सेवा का निजीकरण किया था और अब सरकार ने लगभग 300 सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में देने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं शिक्षा जनता को सुलभ करवाना एक लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व है। गत् यूपीए सरकार ने शिक्षा से वंचित बच्चों को साक्षर बनाने व उनके भविष्य को सही मुकाम देने के लिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम को इसी उद्देश्य से लागू किया था। उन्होंने कहा कि स्कूलों के निजीकरण से सरकारी सम्पत्ति निजी हाथों में चली जाएगी और सरकारी शिक्षक भी सरप्लस हो जाएंगे जिसकी वजह से शिक्षकों की भर्तियों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जिन चिकित्सा सेवाओं का निजीकरण किया गया है उनके द्वारा जनता को होने वाली लाभ-हानि की जानकारी अभी तक सरकार ने सार्वजनिक नहीं की है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेशभर में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है और अव्यवस्थाओं के कारण नवजात बच्चों की मौतों से प्रदेश कलंकित हो रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था को ठप्प कर सरकार अब शिक्षा व्यवस्था को पटरी से उतारना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार के मूलभूत सेवाओं के निजीकरण के फैसले से साबित हो गया है कि सरकार अपने निहित उद्देश्य साधने के लिए जनता के हितों के साथ समझौता कर रही है और सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ा रही है जिसके आगामी समय में विपरीत प्रभाव सामने आएंगे।
पायलट ने बयान जारी कर कहा कि पूर्व में भी प्रदेश की भाजपा सरकार ने चिकित्सा सेवा का निजीकरण किया था और अब सरकार ने लगभग 300 सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में देने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं शिक्षा जनता को सुलभ करवाना एक लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व है। गत् यूपीए सरकार ने शिक्षा से वंचित बच्चों को साक्षर बनाने व उनके भविष्य को सही मुकाम देने के लिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम को इसी उद्देश्य से लागू किया था। उन्होंने कहा कि स्कूलों के निजीकरण से सरकारी सम्पत्ति निजी हाथों में चली जाएगी और सरकारी शिक्षक भी सरप्लस हो जाएंगे जिसकी वजह से शिक्षकों की भर्तियों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जिन चिकित्सा सेवाओं का निजीकरण किया गया है उनके द्वारा जनता को होने वाली लाभ-हानि की जानकारी अभी तक सरकार ने सार्वजनिक नहीं की है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेशभर में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है और अव्यवस्थाओं के कारण नवजात बच्चों की मौतों से प्रदेश कलंकित हो रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था को ठप्प कर सरकार अब शिक्षा व्यवस्था को पटरी से उतारना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार के मूलभूत सेवाओं के निजीकरण के फैसले से साबित हो गया है कि सरकार अपने निहित उद्देश्य साधने के लिए जनता के हितों के साथ समझौता कर रही है और सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ा रही है जिसके आगामी समय में विपरीत प्रभाव सामने आएंगे।
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