Sunday, October 5, 2014

नमस्कार… एक गरम चाय पीयेंगे!

नमस्कार...


ekgaramchaiblog
एक गरम चाय ने इस बार देश में सरकार बना दी और चाय के दिन ऐसे फिरे कि की एक चाय बेचने वाला ही सरकार का मुखिया बन बैठा। खैर, गुफ्तगु का दौर शुरू हो रहा है चुनावी सियासत का अखाड़ा भी साफ नजर आने लगा है। सियासती भंवर में कईयों की चादर सिमट गई है तो वहीं कुछ की चादर बड़ी भी हो गई है। लेकिन चाय का चस्का बरकरार है और रहेगा। इसी एक गरम चाय के साथ हमारा ब्लॉग भी हाजिर है। उद्देश्य यह नहीं की जो बातें हमारे मन में है, उन्हें महज एक गरम चाय के साथ आपके समक्ष रखे, बल्कि असल उद्देश्य यह है कि देश के भितर घातियों और दीमक की तरह देश को ध्वस्त करने वालों का खुलासा भी हम आपके बीच महज एक गरम चाय के साथ कर सके।
इसी तर्ज पर हाजिर है एक गरम चाय...

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