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Friday, September 8, 2017

जल्द उत्तर कोरिया के आने वाले हैं बुरे दिन, ट्रंप ने शुरु की तैयारी

संयुक्त राष्ट्र के द्वारा दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा अमेरिका 

वाशिंगटन । अमेरिका के लिए सिरदर्द बने तानाशाह से निपटने की तैयारी अब शुरु कर दी गई है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया पर कार्रवाई के संकेत दे दिये हैं। इस तैयारी के तहत आने वाले दिनों में उत्तर कोरिया के बुरे दिन जल्द शुरु होने वाले है। क्योंकि वह लगातार एक के बाद एक बमों का परीक्षण करके अमेरिका और अन्य देशों को चुनौती दे रहा है।
इसके बारे में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका पिछले सप्ताहांत जमीन के नीचे हुए विस्फोट का अब भी आकलन कर रहा है लेकिन अभी तक उसे उत्तर कोरिया के दावे को गलत ठहराने वाला कुछ नहीं मिला है। अगर इस परीक्षण की पुष्टि हो जाती है कि तो यह उच्च क्षमता वाले परमाणु हथियार के क्षेत्र में उत्तर कोरिया की बडी बढत को दर्शाएगा। हाइड्रोजन बम उन सरल विखंडन बमों के मुकाबले कहीं अधिक शक्तिशाली होते हैं जिनका इस्तेमाल द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत में अमेरिका ने जापान के शहर हिरोशिमा और नागासाकी में किया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंसे यह पूछे जाने पर कि क्या वह ऐसी स्थिति स्वीकार करेंगे जहां उत्तर कोरिया के पास परमाणु हथियार तो रहे लेकिन वह नियंत्रित रहे और अपने आप रोककर रखे। इस पर ट्रंप ने कहा, कि मैं पिछली सरकारों की तरह केवल बातचीत नहीं करता। मैं उनके बारे में बात नहीं करता लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि उत्तर कोरिया बुरी तरह व्यवहार कर रहा है और उसे रोकना होगा। वहीं अमेरिकी सरकार में एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि अमेरिका बातचीत करने के बजाय उत्तर कोरिया पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
अमेरिका परमाणु परीक्षण के जवाब में सभी प्रकार के तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात को लेकर उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध समेत संयुक्त राष्ट्र में नए तथा और कडे प्रतिबंधों का अनुरोध कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया की सैन्य और औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पडेगा क्योंकि वह अपने तेल संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। हालांकि उत्तर कोरिया को तेल का सबसे बडा निर्यातक चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ऐसे प्रतिबंधों का विरोध कर सकता है।
इस बीच एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन और रुस के विरोध के बावजूद अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उत्तर कोरिया के खिलाफ और नए कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए सोमवार को मतदान कराने को लेकर प्रतिबद्ध है। संयुक्त राष्ट्र में राजनयिकों ने बताया कि अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया पर तेल प्रतिबंध लगाने, कपडों पर प्रतिबंध लगाने और दूसरे देशों में काम रहे उत्तर कोरिया के कामगारों को भुगतान ना करने के प्रस्ताव का मसौदा पेश किया।
लगातार अमेरिका के अनुरोध करने के बाद भी चीन लगातार उत्तर कोरिया का समर्थन करता रहा है। इस पर राजनयिकों ने इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया कि चीन या रुस वीटो का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी प्रशासन ने प्रस्ताव पास कराने के लिए दबाव बनाया है। संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत लियू जिएयी ने अदीस अबाबा में अफ्रीकी संघ मुख्यालय की यात्रा को जल्दी समाप्त कर दिया है ताकि वह न्यूयॉर्क लौटकर प्रस्ताव के मसौदे पर बातचीत में हिस्सा ले सकें। संयुक्त राष्ट्र राजनयिकों ने कहा कि 19 सितंबर को शुरू हो रही महासभा की उच्च स्तरीय चर्चा के दौरान उत्तर कोरिया के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की मंत्री स्तरीय बैठक हो सकती है।

अब चीन को सताया उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम से डर

बीजिंग । चीन अब तक उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा सहयोगी था, लेकिन अब लगता है कि उत्तर कोरिया का यह दोस्त ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाएगा। चीन ने उत्तर कोरिया द्वारा लगातार किए जा रहे परमाणु परीक्षणों को लेकर भारी चिंता प्रकट की है। चीन की चिंता यह है कि उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह उसके खिलाफ भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से नहीं चूकेगा।
चीन अब अपनी सेना को अचानक होने वाले हमले से निपटने के लिए तैयार करने में जुट गया है। चीनी एयरफोर्स ने कोरियाई प्रायद्वीप के पास सैन्य अभ्यास कर 'आकस्मिक हमले' से निपटने की अपनी तैयारियों की समीक्षा की। बोहाई सागर के पास चीन की ऐंटी-एयरक्राफ्ट बटालियन ने अभ्यास किया। यह पीले सागर का अंदरूनी इलाका है, जो चीन और कोरियाई प्रायद्वीप को बांटता है। इस दौरान सैनिक मध्य चीन से इस इलाके तक पहुंचे और फिर ऐसे हमले किए गए जैसे असली युद्ध हो रहा हो।  'इस दौरान देखा गया कि सैनिक कितनी जल्दी कार्रवाई कर रहे हैं और वास्तविक युद्ध की स्थिति में क्या होगा।